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दार्जिलिंग में जनजाति के दर्जे व राज्य को साझा मंच से संघर्ष पर सहमति

फाइल फोटो
दार्जिलिंग : गैर जनजातीय गोरखा जातियों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल कराने के मुद्दे पर विमर्श को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी शनिवार से शुरू हो गई है। नगर के गोरखा रंगमंच भवन में परंपरागत खाद्य पदार्थो, जातीय पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी के साथ शुरू हुई संगोष्ठी में विभिन्न प्रांतों एवं संगठनों के गोरखा नेताओं ने शिरकत की। साथ ही जनजाति के दर्जे एवं गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर साझा मंच से संघर्ष पर सहमति जताई। मोर्चा महासचिव एवं जीटीए के कार्यकारी सभासद रोशन गिरि ने इस दिशा में पार्टी द्वारा उठाए गए कदम एवं इस मांग की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अब गोरखालैंड राज्य की मांग पर भी गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। 

संगोष्ठी के पहले दिन ऑल असम गोरखा स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष प्रेम तमांग, नागालैंड गोरखा एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन प्रधान, गोरखा समाज कल्याण समिति रोकरी के अध्यक्ष बुद्धि सिंह राणा, ऑल अरुणाचल गोरखा वेलफेयर सोसाइटी के महासचिव सनू तमांग, असम गोरखा सम्मेलन के अध्यक्ष अरुण, मेघालय गोरखा वेलफेयर यूनियन के वीआर जोशी, मिजोरम गोरखा यूथ एसोसिएशन के सांगठनिक सचिव त्रिलोक राज जैशी, सदर हिल्स ऑटोनोमस डिस्ट्रिक काउंसिल मणिपुर के कार्यकारी सदस्य विकास बस्नेत, गोजमुमो दिल्ली के कोषाध्यक्ष नीरज छेत्री आदि ने कार्यक्रम को संबोधित किया। लगभग सभी वक्ताओं के संबोधन का सार यही रहा कि नेपाली भाषी भारतीय गोरखाओं की राष्ट्रीय पहचान एवं अस्मिता से जुड़े गोरखालैंड के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने एवं दबाव बनाने के लिए जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग के नेतृत्व में संयुक्त मंच का गठन कर मुहिम शुरू की जाय। इससे पूर्व गोरखा जाति के परंपरागत खाद्य पदार्थ एवं अन्य पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी आयोजित की गई। जहां इनकी बिक्री भी की गई। जिसके लिए बनाए गए स्टॉलों पर मौजूद लोग जातीय पोशाक में थे। संगोष्ठी के दूसरे एवं अंतिम दिन पड़ोसी राज्य सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग एवं जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग भी शिरकत करेंगे।

- जागरण
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