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मोर्चा सुप्रीमो विमल बोले सीएम ममता दीदी ने दार्जिलिंग को बनाया 'मुर्दालैंड'

दार्जिलिंग : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र को स्विट्जरलैंड की तर्ज पर विकसित करने का वादा किया था। परंतु सरकार ने इसे 'मुर्दालैंड' बनाने का कार्य किया। जाति का स्वाभिमान बचाने एवं पश्चिम बंगाल के दासत्व से मुक्ति को जल्द ही गोरखालैंड की अपनी पुरानी मांग के साथ आंदोलन शुरू किया जाएगा। उक्त उद्गार जीटीए प्रमुख एवं गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग ने व्यक्त किए। वे सोमवार को तकभर चाय बागान में आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री के पहाड़ दौरे एवं कर्सियांग में प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के परिसर का शिलान्यास करने की आलोचना करते हुए कहा कि यह पर्वतीय क्षेत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना में बाधा डालने के लिए किया जा रहा है। 

सांसद एवं विधायकों ने भी इसका विरोध किया। जबकि दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर भी इसकी शिकायत की। विमल ने कहा कि गोरखा जातियों को विभक्त करने का कार्य करने वाली सरकार के साथ अब संबंध नहीं रखा जाएगा। सभी गोरखाओं से एकजुट होकर गोरखालैंड राज्य के आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए जीटीए प्रमुख ने कहा कि पांच करोड़ में बिकने की बजाय जाति के हित में कार्य करें। आंध्र प्रदेश सरकार के विरोध के बावजूद तेलंगाना राज्य के गठन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चा जब रोता है, तो मां दूध पिलाती है। गोरखाओं के सपने को अपना सपना बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार गोरखालैंड राज्य की दशकों पुरानी मांग अवश्य पूर्ण करेगी। आंदोलन के स्वरूप की बाबत उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से महात्मा गांधी की विचारधारा के अनुरूप गणतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। जुलूस निकलेगा, परंतु लोग रास्तों पर नहीं बैठेंगे। हड़ताल होगी, परंतु किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की जाएगी।

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