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मक्का: भगदड़ ने ली 717 हाजियों की जान, 2 भारतीयों की भी मौत

मक्का. सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का के मीना में हज के दौरान एक ब्रिज के एंट्रेंस पर भगदड़ मच गई। इसमें 717 लोगों की मौत होने की खबर है। 805 से ज्यादा लोग जख्मी हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मरने वालों में 2 भारतीय भी शामिल हैं। सऊदी में गुरुवार को बकरीद (ईद उल जुहा) मनाई जा रही है। गुरुवार को ही हज का आखिरी दिन भी है। इस दिन शैतान को पत्थर मारने की रस्‍म भी पूरी की गई। इस वजह से बड़ी संख्‍या में लोग मीना में जमा थे।

कैसे मची भगदड़?
- अल जजीरा चैनल और न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, हादसा मीना के 204 स्ट्रीट पर जमारात ब्रिज पर करीब 10.00 बजे (लोकल टाइम) हुआ।
- जमारात ब्रिज 5 मंजिला इमारत है जिसके अंदर से रास्ता से गुजरता है। यहां 3 लाख लोगों के कुछ देर ठहरने के इंतजाम हैं।
- इस ब्रिज के पास हज की एक रस्म होती है। हादसे के वक्त ब्रिज के एंट्री गेट से लेकर एक किलोमीटर दूर तक हाजियों की भीड़ थी।
- जमारात ब्रिज के एंट्री प्वाइंट पर हाजियों का एक ग्रुप बैठा हुआ था। इसी बीच दूसरा ग्रुप वहां पहुंचा।
- धक्कामुक्की की वजह से दूसरे ग्रुप के कुछ हाजी पहले से बैठे लोगों पर चढ़ गए। इसके बाद भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे और कुछ ही मिनट में वहां लाशें ही लाशें बिछ गईं।

किंग कर रहे हैं इंतजामों की निगरानी
सऊदी की सरकारी मीडिया के मुताबिक, किंग सलमान बुधवार से मक्का में ही हैं। वे हज यात्रा के इंतजाम की निगरानी के लिए गए थे। गुरुवार को हुए हादसे के तुरंत बाद उन्‍होंने राहत और बचाव का काम शुरू कराया। सरकार ने 4000 से ज्‍यादा लोगों को इस काम में लगाया। मौके पर 220 से ज्यादा एंबुलेंस बुलवा कर घायलों को अस्‍पताल पहुंचाया गया।

भारतीयों के लिए ये बनाए हैं हेल्पलाइन नंबर
* Helpline nos: 00966125458000, 00966125496000

कुछ दिन पहले भी सौ लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि हज यात्रा का आज आखिरी दिन था। इस बार करीब 20 लाख हज यात्री पहुंचे हैं। 18 सितंबर को मक्का के अल-हरम मस्जिद में क्रेन गिरने से हादसा हो गया था। इसमें 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

पहले भी हो चुका है हादसा
2006 में 12 जनवरी को भी शैतान को पत्थर मारने की घटना के दौरान भगदड़ मची थी जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। बता दें कि मक्का के बाहरी इलाके मीना में शैतान को पत्थर मारने का रिवाज है। इस दौरान हज यात्री सात पत्थर तीन बार शैतान को मारते हैं।

क्यों मारा जाता है पत्थर?
मक्का में पत्थर मारना शैतान के विरोध का प्रतीक है। शैतान का प्रतीक तीन विशाल खंभों के रूप में मौजूद है। यहां हज यात्री कंकड़ इकट्‌ठा करते हैं और उन्हें खंभों पर मारते हैं।

पहले कब हुए हादसे?
- 1987 : ईरानी श्रद्धालुओं और सऊदी गवर्नमेंट के बीच झड़प में 402 लोगों की मौत और 650 लोग घायल।
- 1989 : मक्का में दो बम ब्लास्ट में एक की मौत, 16 घायल।
- 1990 : भगदड़ में 1426 लोगों की मौत।
- 1994 : पत्थर मारने की रस्म के दौरान भगदड़ से 270 लोगों की मौत।
- 1997 : आग लगने से 340 से ज्यादा लोगों की मौत, 1500 घायल।
- 1998 : ओवरपास पर 180 लोगों की मौत।
- 2001 : भगदड़ में 35 लोगों की मौत।
- 2004 : भगदड़ में 200 से ज्यादा लोगों की मौत।
- 2006 : मक्का में ब्रिज पर मची भगदड़ की वजह से 300 लोगों की जान गई।

हज को लेकर क्या हैं सेफ्टी के इंतजाम?
- 1.1 लाख लोगों को तैनात किया गया है।
- 5000 कैमरे लगाए गए हैं, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
- 1.50 लाख लोग भारत से हज करने के लिए गए हैं, किसी देश से सबसे ज्यादा।






 
- Bhaskar 

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