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7/11 मुंबई ब्लास्ट में 5 दोषियों को सजा-ए-मौत, सात को उम्रकैद


मुंबई : 11 जुलाई 2006 को शहर की लोकल ट्रेनों में हुए सीरियल ब्लास्ट के दोषी 12 में से पांच लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। बाकी सात को उम्रकैद की सजा दी गई है।  स्पेशल मकोका कोर्ट के जज यतिन डी शिंदे ने सजा का एलान किया। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वे हाईकोर्ट जाएंगे। बता दें कि वेस्टर्न सब-अर्बन रूट पर चलने वाली ट्रेनों के 7 कोच में हुए सीरियल ब्लास्ट में 189 पैसेंजरों की मौत हो गई थी। 824 लोग जख्मी हो गए थे। जिन लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है, उन पर बम प्लान्ट करने का आरोप साबित हुआ है। इन दोषियों के नाम हैं- कमाल अहमद अंसारी (37) मोहम्मद फैजल शेख (36), ऐहतेशाम सिद्दीकी (30), नवेद हुसैन खान (30) और आसिफ खान (38)।

कमाल अहमद मोहम्मद वकील अंसारी
बिहार के मधुबनी जिले के बासापट्टी से 19 जुलाई 2006 को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि अंसारी ने पाकिस्तानियों को नेपाल बॉर्डर से मुंबई पहुंचने में मदद की। उसने एक्स्प्लोसिव मटीरियल जुटाया और एक ट्रेन में बम भी लगाया। माटुंगा रेलवे स्टेशन पर उसके लगाए बम की वजह से ट्रेन में धमाका हुआ।

मोहम्मद फैसल अताउर रहमान शेख
पुलिस के मुताबिक, फैजल पाकिस्तान में दो बार ट्रेनिंग ले चुका है। उसके लगाए बम की वजह से जोगेश्वरी रेलवे स्टेशन पर धमाका हुआ। शेख ने पाकिस्तानियों को पनाह दी। हवाला के जरिए रकम हासिल की, जिसका टेररिस्ट एक्टिविटीज में इस्तेमाल हुआ। गोवंडी में जब बम बनाए गए तो फैजल वहां मौजूद था।

एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी
मुंबई के मीरा रोड के रहने वाले सिद्दीकी को 29 जुलाई 2006 को अरेस्ट किया गया था। उसे आतंकी संगठन सिमी के महाराष्ट्र यूनिट का ज्वाइंट सेक्रेटरी माना जाता है। उस पर आरोप है कि उसने रेलवे ट्रैकों की रेकी की। पुलिस का कहना है कि सिद्दीकी के लगाए बम की वजह से मीरा रोड रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में धमाका हुआ।

नवेद हुसैन खान
आरोप है कि नवेद ने गोवंडी से एक बम बांद्रा लाकर ट्रेन में लगाया, जो खार रेलवे स्टेशन के पास फट गया। उस पर दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर ट्रेन रूट्स की रेकी करने का भी आरोप साबित हुआ। पुलिस के मुताबिक, जब यह साजिश रची गई तो नवेद वहां मौजूद था।

आसिफ खान
आसिफ को मुंबई एटीएस ने तीन अक्टूबर 2006 को तमिलनाडु के बेलगांव से अरेस्ट किया था। उस वक्त वह अपनी पत्नी और दोस्तों के साथ था। आरोप है कि उसने धमाकों को अंजाम देने के लिए रेक्सीन बैग, बर्तन, अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर्स का इंतजाम किया। उसने जिस ट्रेन में बम लगाया, उसमें बोरीवली स्टेशन के करीब धमाका हुआ था।

- उम्रकैद पाने वालों पर इस साजिश में मदद करने और रेकी करने के आरोप साबित हुए हैं। जिन्हें उम्रकैद हुई, वे हैं-तनवीर अहमद अंसारी (37), मोहम्मद माजिद शफी (32), शेख आलम शेख (41), मोहम्मद साजिद अंसारी (34), मुजम्मिल शेख (27), सोहल महमूद शेख (43) और जमीर अहमद शेख (36)।

- प्रॉसिक्यूशन ने 12 में से 8 के खिलाफ फांसी की सजा की डिमांड की थी। गवाहों के क्रॉस एग्जामिनेशन के बाद डिफेंस के वकीलों ने कोर्ट से नरमी बरतने की अपील की थी। उनका कहना था कि असली मास्टरमाइंड पाकिस्तानी आतंकी चीमा है, जिसके इशारों पर इस वारदात को अंजाम दिया गया।

- 11 सितंबर को इस मामले में आरोपी 13 में से 12 को दोषी करार दिया गया था। एक आरोपी को बरी कर दिया गया था। 23 सितंबर को स्पेशल मकोका कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था।

क्या है पूरा मामला?

- ब्लास्ट शाम छह बजकर 24 मिनट से लेकर 6 बजकर 35 मिनट के बीच हुए। यह वो वक्त था, जब मुंबई के लोकल ट्रेनों में लाखों पैसेंजर काम के बाद घर लौटते हैं।

- एंटी टेररिज्म स्क्वैड ने 20 जुलाई, 2006 से 3 अक्टूबर, 2006 के बीच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

- उसी साल नवंबर में आरोपियों ने कोर्ट को लिखित में जानकारी दी कि उनसे जबरन इकबालिया बयान लिए गए।

- चार्जशीट में 30 आरोपी बनाए गए। इनमें से 13 की पहचान पाकिस्तानी नागरिकों के तौर पर हुई। फरार पाकिस्तानियों में लश्कर का आतंकी आजम चीमा भी शामिल है। बाकी 17 भारतीय हैं। इन 17 में से 4 की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई।

- सभी आरोपी सिमी के संदिग्ध आतंकी थे। ट्रायल पिछले साल अगस्त में खत्म हुआ था। प्रॉसिक्यूशन ने 192 गवाहों को एग्जामिन किया। डिफेंस लॉयर ने 51 गवाहों को एग्जामिन किया।

- केस में कई उतार-चढ़ाव आए। 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगा दी। एक पिटीशन में मकोका कानून के प्रोविजन को चैलेंज किया गया था। दो साल बाद, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर से ट्रायल शुरू हुआ।

क्या कहना है प्रॉसिक्यूशन का?
प्रॉसिक्यूशन का कहना है कि बम मुंबई में ही बनाए और असेंबल किए गए। बम फर्स्ट क्लास के कंपार्टमेंट्स में शाम के वक्त इस तरह प्लान्ट किए गए कि वे 11 मिनट के टाइम पीरियड में सिलसिलेवार ढंग से उनमें ब्लास्ट हो। ये बम प्रेशर कुकर में प्लान्ट किए गए थे। एटीएस के मुताबिक, बम ब्लास्ट का मकसद एक 'खास कम्युनिटी' को निशाना बनाना और गुजरात दंगों का बदला लेना था।

दोषियों ने लिखी थी पीड़ित परिवारों को चिट्ठी
12 दोषियों ने हाल ही में पीड़ितों के परिवारवालों को चिट्ठी लिखी थी। नौ पेज के लेटर में लिखा था, ''हम आपसे दरख्वास्त करते हैं कि आप हमारे साथ हाईकोर्ट में खड़े हों। कोर्ट में एक याचिका लगाएं, जिसमें रिक्वेस्ट की जाए कि असली गुनहगारों को सजा हो, निर्दोष लोगों को नहीं। फैसले से आपको खुशी और संतुष्टि मिलना स्वाभाविक है। हालांकि, हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि आपकी यह खुशी असली नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हम 12 आपके करीबियों की हत्या के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। हम खुद पीड़ित हैं।''

इनपुट - भास्कर 


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