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साल 2015 में यूरोपीय देशों में खूब बिकी दार्जिलिंग की मशहूर चाय

दार्जिलिंग : यूरोपीय देशों ने इस साल दार्जिलिंग चाय खूब खरीदी है। इससे उत्पादन की बढ़ती हुई लागत से परेशान उत्पादकों को कुछ हद तक राहत मिलेगी। यूरोपीय देशों द्वारा भारी मात्रा में खरीदारी इस बात का संकेत है कि वे 2016 से 100 फीसदी दार्जिलिंग चाय बेचने की तैयारी कर चुके हैं। यूरोप में पहले मिश्रित चाय बेची जाती थी जिसमें सिर्फ दार्जिलिंग चाय ही नहीं हुआ करती थी, अन्य चायों को भी इसमें मिलाया जाता था लेकिन मिश्रित चाय को भी दार्जिलिंग चाय के नाम से ही बेचा जाता था। दार्जिलिंग चाय असोसिएशन (डीटीए) के चेयरमैन एस.एस.बागड़िया ने बताया, 'उम्मीद है कि योरीपय संघ भारत से और चाय की खरीदारी करेगा क्योंकि इसने दार्जलिंग चाय के नाम पर बिकने वाली मिश्रित चाय को हटाने और 2016 से ग्राहकों को 100 फीसदी ताजा दार्जिलिंग चाय बेचने का निर्णय किया है।

बागड़िया ने बताया कि दार्जिलिंग टैग लगने का मतलब है कि यूरोपीय देशों में सिर्फ दार्जिलिंग में उत्पादित चाय को ही दार्जिलिंग चाय के नाम से बेचा जाए। जो लोग दार्जिलिंग चाय के नाम से मिश्रित चाय बेचते थे, उनको 100 फीसदी दार्जिलिंग चाय बेचने के लिए पांच साल का समय दिया गया था। यूरोपीय आयोग ने 2011 में दार्जिलिंग चाय को पीजीआई प्रॉडक्ट के तौर पर रजिस्टर्ड किया था। इस तरह से भारत की यह पहली कमोडिटी थी जिसे यह दर्जा मिला था। डीटीए के चेयरमैन ने बताया कि हालांकि यूरोपीय संघ को निर्यात तो बढ़ा है लेकिन पिछले साल से चाय के दाम नहीं बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि 'उत्पादन की लागत हर साल बढ़ रही है। लेकिन, उत्पादन लागत के मुताबिक चाय के दाम नहीं बढ़ रहे हैं। 2015 में दार्जिलिंग चाय का करीब 40 लाख किलोग्राम निर्यात होने की उम्मीद है जो 2014 की तुलना में 30,000-40,000 हजार किलोग्राम ज्यादा होगा। दार्जिलिंग की 87 कंपनियों ने इस साल 80 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन किया है।

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