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ब्रिटेन में द्विपक्षीय युद्धाभ्‍यास में भारतीय वायुसेना ने गाड़े झंडे

नई दिल्‍ली: अंतरराष्ट्रीय मंच के इवेंट में भारतीय वायु सेना के जांबाज पायलटों ने झंडे गाड़ दिए हैं। भारतीय वायुसेना के पायलटों ने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर्स के साथ अभ्यास में ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स के पायलटों को जो कि टाइफून जेट पर थे, 12-0 के अंतर से हरा दिया। यह स्पर्धा विदिन विजुअल रेंज (WVR) डॉगफाइटिंग ऑपरेशंस में हुई थी। इसके बाद लार्ज फोर्स एक्सरसाइज (LFE) में सुखोई 30 और टाइफून ने तमाम आकृतियां बनाईं लेकिन यहां पर RAF के पायलट कुछ कामयाब दिखे। एनडीटीवी के दिए खास इंटरव्यू में भारतीय वायुसेना दल के प्रमुख ग्रुप कैप्टन आशु श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पायलटों का प्रदर्शन शानदार था। श्रीवास्तव जो कि सुखोई 30 उड़ाने में सर्वाधिक तजुर्बेकार माने जाते हैं, ने कहा कि हमारे पायलटों ने नए माहौल और ऑपरेटिंग सिस्टम में उम्‍दा प्रदर्शन किया।

21 जुलाई को शुरू हुआ 10 दिवसीय युद्धाभ्‍यास इंद्रधनुष भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाला ऐसा चौथा अभ्‍यास था। भारतीय वायुसेना के विमान और अधिकारी रॉयल एयरफोर्स के 3 बेसों पर रखे गए थे। भारतीय वायुसेना के 4 सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमान कॉनिंग्‍सबे बेस से उड़े, जबकि रॉयल एयरफोर्स के C-17 और C-130J हर्कूलस ट्रांसपोर्ट विमान को ब्रिज नॉर्टन बेस पर रखा गया था। वहीं भारतीय वायुसेना के गार्ड कमांडो ब्रिटिश सैनिकों के साथ हॉनिंग्‍टन बेस से ऑपरेट कर रहे थे। भारतीय वायुसेना ने ब्रिज नॉर्टन बेस पर हवा से हवा में ईंधन भरने वाले इल्‍यूशिन आईएल-78 विमान को भी तैनात किया था।

भारतीय वायुसेना का दल 15 जुलाई को रवाना हुआ था और अपने पहले पड़ाव सऊदी अरब के तैफ पहुंचने से पहले उन्‍हें हवा में ही दो बार ईंधन भरना पड़ा। उसके बाद वो एथेंस की ओर बढ़े और वहां पहुंचने से पहले एक बार और ईंधन भरा। अगले पड़ाव पर एक रात रुकने के बाद हवा में एक और बार ईंधन भरकर भारतीय वायुसेना के विमान ब्रिटेन पहुंच गए। रॉयल एयरफोर्स के लिए रूस में सुखोई Su-30 MKI, जो कि दुनिया में चौथी पीढ़ी का सबसे अच्‍छा विमान है, के साथ प्रशिक्षण पाने का सुनहरा मौका था। भारत दुनिया में सुखोई Su-30 MKI का इस्‍तेमाल करने वाला सबसे बड़ा देश है और वायुसेना के अधिकारी रॉयल एयरफोर्स के नए यूरोफाइटर टाइफून के सामने अपनी क्षमता दिखाने को बेताब थे। रॉयल एयरफोर्स की लड़ाकू बेड़े का टाइफून अब मुख्‍य विमान है।

युद्धाभ्‍यास का पहला हफ्ता सुखोई Su-30 MKI की हवाई लड़ाई के अलग-अलग सिनारियो के रहे। पहले एक विमान का एक विमान से कई तरह से मुकाबला हुआ जिसमें दो मील के रेंज से संकेतिक मिसाइलें दागी गईं। बाद में 2-2 विमानों का मुकाबला भी हुआ जिसमें दो सुखाई और दो टाइफून विमानों ने अपना कमाल दिखाया। उसके बाद 2 के मुकाबले एक विमान का भी मुकाबला हुआ। गौर करने वाली बात ये रही कि दो टाइफून विमानों से मुकाबले में एक अकेले सुखोई ने बाजी मार ली और दुश्‍मन के दोनों विमानों को मार गिराया।

इस प्रकार के डॉगफाइटिंग अभ्यास में दोनों ही एयरफोर्स के आधुनिक लड़ाकू जहाजों ने अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन किया। वहीं यहां पर वर्तमान में मौजूद दोनों सेनाओं ने रडार का भी भरपूर प्रयोग किया। बताया जा रहा है कि दोनों ही सेनाओं के पायलटों ने लगभग युद्ध के हालातों में यह अभ्यास किया। भारतीय दल में युवा फ्लाइट लेफ्टिनेंट से लेकर वरिष्ठ ग्रुप कैप्टन तक मौजूद थे और ऐसा ही ब्रितानी दल था। भारतीय दल आईएएफ का 2 स्क्वाड्रन था जो कलाइकुंडा में बेस है। इस अभ्यास के जरिए दोनों सेनाओं के पायलटों के युद्ध के माहौल से परिचित कराना था ताकि वह यह जान सकें ऐसे हालात में किस प्रकार अपने हुनर का प्रदर्शन बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

इस दल में भारतीय वायुसेना के टैक्टिक्स एंड एयर कॉमबैट डेवलेपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (TACDE) का कोई भी वरिष्ठ पायलट नहीं था। बताया जा रहा है कि जब तक यह अभ्यास अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश करता भारतीय वायुसेना के पायलट अपने आप को नए माहौल में रमा चुके थे। एलएफई में भारतीय पायलटों के प्रदर्शन के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में श्रीवास्तव ने कहा कि यहां पर हमारे पायलटों का प्रदर्शन बढ़िया था, लेकिन रिजल्ट को आंकड़ों में बताना मुश्किल है। RAF से मिले समर्थन की श्रीवास्तव ने तारीफ की और कहा, मेजबान काफी अच्छे थे और वह कभी भी सपोर्ट के लिए तैयार हैं।

रुप कैप्टन श्रीवास्तव के अनुसार, 'युवा पायलटों के बीच अच्छी बातचीत हुई। आरएएफ के सी-17 स्क्वाड्रन नेपाल में भूकंप के बाद काठमांडू में मदद करना चाहता था। वहां प्रभावितों की काफी मदद की जा सकी।" आरएएफ पायलटों ने भारतीय वायु सेना के पायलटों के साथ आक्रमण के दौरान लैंडिंग, मुकाबला और बड़े विमान के कॉकपिट से अवलोकन आदि का प्रदर्शन किया। भारतीय वायु सेना के पायलटों ने ऊंचाई पर सी-17 के संचालन के अपने अनुभवों को उनके साथ साझा किया। ग्रुप कैप्टन श्रीवास्तव के अनुसार, "यह सब एक-दूसरे से सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा था। इसमें एक-दूसरे के अनुभवों को साझा किया गया।" अंत में भारतीय वायु सेना के इन अभ्यासों के जरिए अपने पायलटों के कौशल स्तर का आकलन किया गया।

 


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