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46 साल बाद खुलासा, चांद से लौटने वालों की भी हुई कस्टम चेकिंग

वॉशिंगटन : इंसान को चांद पर पहुंचाने वाले अमेरिकी अंतरिक्ष मिशन अपोलो-11 से जुड़ी ऐसी ही रोचक जानकारी सामने आई है। अंतरिक्ष यान के पायलट और नील आर्मस्ट्रांग के बाद चांद पर कदम रखने वाले दूसरे  व्यक्ति बज एल्ड्रिन ने सोशल मीडिया पर ट्रेवल वाउचर जारी किया है। यह उन्होंने चांद से लौटने के बाद नासा को पेश किया था। उन्होंने कस्टम फॉर्म भी सार्वजनिक किया है, जिस पर उन्होंने "मून रॉक्स" और "मून डस्ट सैंपल" का जिक्र किया था। इस फॉर्म पर मिशन कमांडर नील आर्मस्ट्रांग ने भी दस्तखत किए थे।  85 वर्षीय एल्ड्रिन के मुताबिक अधिकारियों को जानकारी दी थी कि वे अपने साथ चांद से मिट्टी और चट्टान लाए हैं, इसलिए कस्टम अधिकारियों ने उनकी जांच की थी।

ट्रेवल वाउचर में एल्ड्रिन ने बताया था कि वे निजी कार से अपने घर से ह्यूस्टन (टेक्सस) स्थित एलिंगटन एयरफोर्स बेस पहुंचे। वहां से सरकारी विमान में सवार होकर फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर पहुंचे। वहां से सरकारी अंतरिक्षयान में सवार होकर चांद पर पहुंचे और फिर उसी यान से फ्लोरिडा वापसी की। एल्ड्रिन ने यह भी लिखा है कि खाने-पीने और रहने का खर्च सरकार ने वहन किया था। अगस्त 1969 में नासा ने चेक से एल्ड्रिन को इस राशि का भुगतान किया था।एल्ड्रिन ने 46 साल बाद इस बात का खुलासा किया है। अपोलो-11 ने 16 जुलाई 1969 को उड़ान भरी थी। आठ दिन बाद यान पुनः धरती पर लौट आया था। एल्ड्रिन ने 33.31 डॉलर का ट्रेवल वाउचर प्रस्तुत किया था। आज की स्थिति में यह राशि 216 डॉलर यानी करीब 13800 रुपए होती है।

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