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झाड़ू-पोछा करने वाली की बिटिया ने जीते स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड गेम्स में 4 पदक

नई दिल्ली। स्कूल से आए दिन आ रहे फोनों और दुनिया के तानों से तंग आकर लक्ष्मी दो साल पहले जिस पुष्पा को गांव (नेपाल) में अपने रिश्तेदारों के यहां भेजना चाहती थी आज उसी बिटिया ने मां का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। पुष्पा ने लॉस एंजिलिस में चल रहे स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड समर गेम्स की पावर लिफ्टिंग स्पर्धा में शनिवार को एक रजत सहित चार पदक जीतकर ताना देने वालों का मुंह बंद कर दिया। पुष्पा ने बेंच प्रेस में रजत, स्क्वाट, डेड फ्लिट और ऑल लिफ्ट में कांस्य पदक जीते।

सरोजनी नगर में लोगों के घरों में खाना बनाने और झाड़ू-पोछे का काम करने वाली लक्ष्मी के तीन बच्चे हैं। पति ने दूसरी शादी कर ली है। बड़ी बेटी रूपा 12वीं कर चुकी है। बेटा सबसे छोटा है। पुष्पा एक तो मानसिक रूप से अक्षम है फिर उसका वजन भी बहुत ज्यादा है। मुहल्ले के बच्चे मोटी-मोटी कहकर उसका मजाक उड़ाते थे। स्कूल में पुष्पा अक्सर गिर जाती थी। लक्ष्मी को काम छोड़कर स्कूल जाना पड़ता था। इससे तंग आकर 2013 में लक्ष्मी ने ठान लिया था कि पुष्पा का स्कूल छुड़वाकर उसे नेपाल रिश्तेदारों के यहां भेज देगी। वहां उनके घर में काम करेगी तो दो वक्त का खाना मिल जाएगा। बेबस मां की बात सुनकर क्लास टीचर अनुपमा भी दुखी हुई। उन्होंने लक्ष्मी को कहा की मुझे दस दिन का समय दो अगर मैं कुछ नहीं कर पाई तो तुम इसे भेज देना। 17 वर्षीय पुष्पा सरोजनी नगर सीनियर सेकेंडरी स्कूल नगर-3 में नौवीं की छात्रा हैं।

बहन बनी परछाई
अनुपमा ने उसकी बड़ी बहन रूपा से बात की। उन्होंने कहा कि उसे प्यार की जरूरत है। उसकी जिंदगी संवारने के लिए तुम्हें उसका सहारा बनना होगा खर्च की चिंता मत करना वह मैं करूंगी। उसके मोटापे को देखते हुए उसे पावर लिफ्टिंग की कोचिंग देनी शुरू की। रूपा रोजाना उसे जिम ले जाने लगी। धीरे-धीरे पुष्पा की जिंदगी बदलने लगी। रूपा की तपस्या और पुष्पा की मेहनत 2014 में रंग लाई जब उसने पटियाला में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो स्वर्ण सहित कुल तीन पदक जीते। रूपा कहती हैं कि मैं बहुत खुश हूं बहन को जीने का कारण मिल गया। जो लोग उसे चिढ़ाते थे उन्हें भी उसने जवाब दे दिया। पुष्पा को कम दिखता और सुनाई भी कम देता है। लेकिन वह डांस और फैशन की शौकीन हैं।

'आज मैं चैन से सो पाऊंगी। पिछले एक हफ्ते से मैं सो नहीं पाई हूं। पुष्पा को उसका मुकाम मिला और मुझे सुकून। पुष्पा ने मुझे वह खुशी दी है जो मेरी बेटी भी मुझे नहीं दे पाती।' -अनुपमा, पुष्पा की क्लास टीचर

'मैं पुष्पा के लिए बहुत खुश हूं। उसे जिंदगी जीने का मकसद मिल गया। मुझे खुशी है कि मैंने एक स्पेशल बच्ची को नई जिंदगी दी। मेरा जीवन सफल हो गया।' -विक्रम सिंह रावत, पुष्पा के कोच


- दैनिक जागरण
 

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