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फिल्म समीक्षा : ‘एबीसीडी-2′ फिल्म समीक्षा: जबर्दस्त डांस के साथ अधूरा छूटा रोमांस

अगर आप नृत्य, जो आजकल डांस के नाम से अधिक जाना जाता है पसंद करते हैं और थ्री-डी तकनीक के भी मुरीद हैं तो ‘एबीसीडी 2’ आपको एक धमाकेदार फिल्म लगेगी। हिंदी में समकालीन डांस को लेकर कम ही फिल्में बनी हैं और एबीसीडी कड़ी की पहली फिल्म आने के बाद इस तरह की फिल्मों को लेकर उत्साह बना है। हालांकि इसकी एक और बड़ी वजह टीवी चैनलों पर आनेवाले डांस के रियलिटी शो भी हैं। आकस्मिक नहीं कि ‘एबीसीडी-2’ की शुरुआत भी एक डांस रिएलिटी शो से होती है। इस शो में भाग लेनेवाली टीम ‘मुंबई स्टनर’ को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक विदेशी डांस शो की कोरियोग्राफी चोरी की। इसके बाद तो ‘मुंबई स्टनर’ के प्रमुख डांसर सुरेश (वरुण धवन) और विनी (श्रद्धा कपूर) को गहरा मानसिक आघात लगता है। लेकिन सुरु यानी सुरेश हिम्मत नहीं हारता। आखिर वो क्यों हारे? उसे कपिल शर्मा के कॉमेडी शो के नवजोत सिंह सिद्धू से गुरुमंत्र जो मिला है कि उसे अपना विश्वास नहीं खोना है।

सो, सिद्धूबाबा की वाणी से प्रेरणा लेकर सुरु और विनी अपनी इज्जत बचाने के लिए लास वेगास में होनेवाले डांस शो में भाग लेना चाहते हैं। उन्हें मदद मिलती है विष्णु सर (प्रभुदेवा) से। वे लास वेगास पहुंच तो जाते हैं लेकिन वहां विष्णु सर का अपना एजंडा है। वे अचानक गायब हो जाते हैं। उसके बाद हादसे में विनी को चोट लग जाती है। ऐसे में क्या सुरु और विनी की टीम अपना सपना पूरा कर पाएगी? समझ लीजिए कि कुछ-कुछ ‘चक दे इंडिया’ वाली स्थिति है। जहां तक डांस और कोरियोग्राफी का सवाल है, यह एक जबर्दस्त फिल्म है और थ्री-डी तकनीक की वजह से इसमें एक चमत्कार भी आ गया है। इस लिहाज से यह इस कड़ी की पहली फिल्म एबीसीडी से कई गुणा आगे की है। न सिर्फ प्रभुदेवा बल्कि वरुण और श्रद्धा के डांस वाले दृश्य गजब के हैं। वैसे यह फिल्म एक सच्ची कहानी पर आधारित है। मुंबई के नाला सोपारा की फिक्टिशस डांस कंपनी ने लास वेगास के डांस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। निर्देशक रेमो डिसूजा ने कहा भी है कि उन्होंने मूल घटना में ज्यादा फेरबदल नहीं किया है। उस डांस ग्रुप के एक प्रमुख सदस्य का नाम भी सुरेश है जिसका किरदार वरुण धवन ने निभाया है। ‘एबीसीडी-2’ एक अलग तरह की प्रेरणादायी फिल्म है। अलग तरह की इसलिए कि इसका अंत थोड़ा अप्रत्याशित है। वरुण धवन ने शायद इसी फिल्म के लिए सिक्स पैक्स ऐब्स बना लिए हैं जो शायद दूसरी फिल्म में भी काम आएंगे।

लेकिन कुछ बातें ऐसी भी इस फिल्म में हैं जो खटकती हैं। एक तो वरुण और श्रद्धा के बीच वाला रोमांटिक पहलू अविकसित रह गया है जिसकी पूरी संभावना थी। हो सकता है कि निर्देशक ने जानबूझकर ऐसा किया हो ताकि डांस वाला पहलू पीछे न छूट जाए। अगर इस रोमांटिक पहलू पर अधिक ध्यान दिया जाता तो फिल्म ज्यादा जज्बाती होती। इसके अलावा फिल्म के गाने अच्छे हैं लेकिन सिनेमा हॉल से निकलने के बाद मन में बस नहीं पाते। तीसरी यह कि फिल्म के संवाद भी वजनदार नहीं हैं। इस पर अधिक काम करने की जरूरत थी। फिर भी यह फिल्म युवा वर्ग में लोकप्रिय होगी और डांस केंद्रित फिल्मों में अपनी खास जगह बनाएगी। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी भी शानदार है और लास वेगास के कई दृश्य मन को लुभाने वाले हैं। प्रभुदेवा अपने चेहरे पर भावनाओं की विविधता नहीं ला पाते लेकिन उनका दक्षिण भारतीय लहजा और डांस धमाका करने वाले हैं। फिल्म में कई अच्छे मजाकिया दृश्य हैं। रेमो का अपना एक खास तरह का सेंस ऑफ ह्यूमर है जो प्रभुदेवा वाले दृश्यों में बखूबी उभरा है।

निर्देशक- रेमो डिसूजा, कलाकार- प्रभुदेवा, वरुण धवन, श्रद्धा कपूर, लॉरेन गोटलीब

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