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सिनेमा की भाषा और भारतीय-नेपाली सिनेमा के इर्द-गिर्द रहा 'आवाम का सिनेमा'

आजमगढ़ : शिब्ली नेशनल कालेज में 'प्रतिरोध की संस्कृति आवाम का सिनेमा' के दूसरे दिन बुधवार की शाम 'सिनेमा की भाषा और भारतीय-नेपाली दस्तावेजी फिल्मों में उसका इस्तेमाल' विषय पर मंत्रणा हुई। हालांकि यह शाम पूरी तरह भारत व नेपाली फिल्म के इर्द-गिर्द ही रही। मुख्य वक्ता नेपाल से आए नेपाली फिल्म उद्योग में प्रतिरोध की संस्कृति के लेखक ऋषभदेव घिमिरे ने प्रतिरोध की संस्कृति व कला पर विचार रखते हुए आह्वान किया कि परिवर्तन के लिए लड़ो। कहा कि सिनेमा के माध्यम से समाज जागृत होता है। सिनेमा भारत में भी बनता है और नेपाल में भी लेकिन असल सिनेमा का मकसद तब पूरा होगा जब वैचारिक धरातल मजबूत होगा और यह प्रतिरोध से ही संभव है। 

उन्होंने कहा कि बेहद खुशी की बात है कि नेपाल व भारत का संबंध सिर्फ फिल्म उद्योग के विकास क्रम तक सीमित नहीं है बल्कि नेपाल से भारत का संबंध प्राचीनकाल से लेकर आज तक हर मोर्चे पर सफल रहा है। नेपाली फिल्म की अभिनेत्री एवं निर्देशक रायल कल्पना ने कहा कि फिल्म जगत से जुड़े लोगों को मिलकर फिल्म विकृति को रोकना होगा। यानी सब मिलाकर प्रतिरोध करें। कहा कि हमने सामाजिक, पारिवारिक, राजनितिक नेपाली फिल्में हमने भी की हैं। आज के दौर में 75 फीसद फिल्में विकृति पैदा करती हैं। स्वार्थसिद्धि के लिए युवाओं को इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी उथल-पुथल को केंद्र में रखकर मैनें फिल्म पूरी की है। उन्होंने कहा कि हाशिए के समाज के लोगों को सिर्फ चुनाव के दौरान ही इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कई मार्मिक कथा सुनाते हुए कहा कि ऐसा ही आवाम का सिनेमा है। अध्यक्षता समाजवादी ¨चतक विजयनारायण व संचालन समिति के महासचिव सुनील दत्ता ने किया।

- जागरण

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