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देहरादून की संस्थाओं ने नेपाल में पहुंच राहत पहुंचाई, 10 दिन बाद वापसी

वीर गोरखा न्यूज़ नेटवर्क
देहरादून।
राजधानी देहरादून की कई स्वयं सेवी संस्थाओं ने नेपाल के गोरखा व धादिङ जिले के विभिन्न भुकम्पग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर वहां का हाल जाना व दोनों जिलों के कई सीमान्त गॉवों में राहत सामग्री वितरित की। विगत 5 मई से भूकंपग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर 10 बाद देहरादून लौटी स्वयं सेवी संस्थाओं में श्री गंगा उद्वार सेवा समिति चंद्रबनी देहरादून, भागवतकुंज हरिद्वार, सबकी सहेली ग्रुप देहरादून, के सामाजिक कार्यकर्ताओं/कार्यकर्तियों ने टीम में बँटकर न सिर्फ ग्रामीणों का हाल जाना बल्कि व्यापक अध्ययन कर जरूरतमन्द लोगों को टेंट, कम्बल, दवाइयां व खाद रसद सामग्री व कपडे बांटे। श्री गंगा उद्वार सेवा समिति चंद्रबनी की उपाध्यक्ष पूजा सुब्बा व गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट की राष्ट्रीय अध्यक्ष उमा उपाध्याय के नेतृत्व में सुनीता क्षेत्री, कमल घले, शुभम सिन्धवाल की टीम ने गोरखा जिले के स्यामच्येत व थुमी गॉव का भ्रमण किया जो सड़क मार्ग से लगभग 5 से 35 किमी. दूरी पर बेहद खड़ी चढ़ाई पर स्थित गाविसा हैं व यहाँ बहुत तबाही हुई है।


टीम ने जानकारी देते हुए बताया कि इन दोनों गवीसा में एक भी घर ऐसा नहीं है जो रहने लायक बचा हुआ हो. 1250 परिवारो के थुमी गविसा में 20 लोगों की मौत हुई है. व एक भी घर रहने लायक नहीं है वहीँ श्यामच्येत् तक अभी भी राहत नहीं पहुँच पाई थी लोग जैसे तैसे एक समय खाना खाकर जीवित हैं। तमांग जाति के इस गॉव की स्थिति विकट है न घर न कपडे न खाना ! पिछड़े होने के कारण इनकी सुनने वाला कोई नहीं है। टीम लीडर पूजा सुब्बा ने बताया कि जहाँ श्यामच्येत् गविसा में खाद रसद दवा टेंट व कपड़ों की बेहद आवशयक्ता है वहीँ थुमी गविसा में टेंट पहली प्राथमिकता है। जीडीएफ की राष्ट्रीय अध्यक्ष उमा उपाध्याय ने बताया कि आरु अर्वाङ्ग, भदौर के हालात भी ऐसे हैं गॉव तबाह है खाद रसद धीरे धीरे लोगों तक पहुंव रही है लेकिन घर सभी के खंडहर हैं।

समाजसेविका पूजा सुब्बा व उमा उपाध्याय ने बताया कि उत्तराखंड से कई समाजसेवी संगठन मदद के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन धादिंग व गोरखा जिले के सीमान्त क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए उनकी टीमों ने कड़ी मेहनत की है. सड़क मार्ग से 30 से 40 किमी. दूर बसे गॉवों तक भी उनके कार्यकर्ता पहुंचे हैं। जिन्होंने विस्तृत जानकारी देने के बाद आंकड़े जुटाए हैं और हमारा यही प्रयास रहा कि हर उस व्यक्ति तक राहत सामग्री पहुंचे जो उसके लायक है। उन्होंने कहा कि टीम दुबारा जायेगी क्योंकि कई जगह अभी भी इसकी सख्त आवश्यकता है. साथ ही उन्होंने गोरखाली सुधार सभा देहरादून के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हमारे लौटने के बाद सभा द्वारा बलवा गॉव में राहत बांटी गई है।

वहीँ भागवतकुंज हरिद्वार के भागवताचार्य पण्डित बसन्त राज के नेतृत्व में दूसरी टीम बिमला अधिकारी, तील काफ्ले, ऋषिकेश पोखरेल, निर्मला काफ्ले की टीम ने धादिङ जिले के बसेरी गाविसा के कई वार्डों का भ्रमण किया । लगभग 5000 परिवारों की इस गविसा के ज्यादातर घर मटियामेट हुए हैं. सिर्फ 10 प्रतिशत ही घर ऐसे हैं जहाँ जीवन यापन हो सकता है। देवराली टोल, आरुन डांडा, महालक्ष्मी टोल, लहरे टोल, सानो बसेरी इत्यादि गॉव का दौरा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए भागवताचार्य पण्डित बसन्त राज ने बताया कि इस गॉव में सरकारी मदद के रूप में 7 हजार रूपये प्रत्येक परिवार को पहुंचे हैं जबकि एनजीओ के माध्यम से एक एक वार्ड तक खाद सामग्री भी पहुँच रही ही है लेकिन जिस परिवार में सिर्फ बृद्ध व्यक्ति ही जीवित हैं वहां यह सब नहीं पहुँच पा रहा है जिससे स्थिति भयावक बनी हुई है। यहां के लोगों का कहना है कि जैसे तैसे अन्न खाकर तो जी ही लेंगे लेकिन सिर के ऊपर छत्त नहीं है जिससे भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।

तीसरे दल सबकी सहेली ग्रुप की मन्जू कार्की व कमला थापा के नेतृत्व में लक्ष्मी अधिकारी व अच्युत अधिकारी की टीम ने धादिङ जिले बूढी गण्डकी के बांये छोर पर बसे आरु घाट, बालुटार,सल्यानटार, पालुंगटार, पानघाटे, ज्यामरुंदग, टारी बेसी, मुरेलि भन्ज्याङ का दौरा कर जानकारी दी कि सबसे अधिक तबाही व्यवस्थित बाजार आरुघाट में हुई कई बहुमंजिला इमारतें नष्ट हुई और 8 लोगों की मौत हुई वहीँ सल्यानटार व पालुंगटार में 23 लोगों की मृत्यु हुई हैं. सभी गॉव में घर मकान बुरी तरह से तबाह हैं। सल्यानटार में बाराती खाना खाने के बाद सोये थे तब यह तबाही आई और 23 लोग मरे।  वहीँ आरुघाट धादिंग व आरुघाट गोरखा में लगभग 150 लोगों की मौत हुई है।

स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ नेपाल के भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन कर लौटे वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल सचिव बद्री केदार सामाजिक एवम् सांस्कृतिक संस्थान ने गोरखा जिले के हरमटारी, आले-भज्यांग, फ़िनाम, डेरा गॉव, कोखे, आहाले, ताप्ले, झिंगाते, श्याम बाजार, असरांग, बगुवा, घेम्पेशाल, लामाचौर, पीपलडांडा, तान्ड्रग् गोरखा, बारपाक, लपराक, मानबू, गुमदा व धादिङ के रीई व घरधरे इत्यादि गांव का दौरे का विवरण देते हुए बताया कि गोरखा के बरपाक गविसा में 1400 परिवार में मात्र 11 घर खड़े हैं बाकी सब नेस्तानाबूद हो गए हैं व इस गांव में 67 मौतें हुई हैं वहीँ मानबु में 9 तथा गुम्दा में 35 मौत हुई हैं। गोरखा के अन्य गांव मुस्लिम आबादी के गॉव हैं। देहरादून की स्वयंसेवी संस्थाओं का नेपाल के गोरखा व धादिंग जिले का भ्रमण, सीमान्त गांवों में पहुँच राहत पहुंचाई और 10 दिन बाद देहरादून वापसी की । 











 

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