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नगालैंडः 'रेपिस्ट' के हत्यारों की तलाश तेज, 4000 मुस्लिमों का पलायन

गुवाहाटी/दीमापुर: नगालैंड के दीमापुर में सेंट्रल जेल से बाहर लाकर मारे गए रेप के आरोपी की हत्या के दोषियों की पुलिस ने गिरफ्तारी तेज कर दी है। केंद्र सरकार द्वारा सख्त कार्रवाई के निर्देश के बाद हरकत में आए स्थानीय प्रशासन ने अब तक 22 लोगों की गिरफ्तारी की है। भीड़ में आए हत्या के आरोपियों को पकड़ने के लिए जिला प्रशासन वीडियो फुटेज खंगाल रहा है जो कि कई लोगों ने उस दौरान शूट की है। इस बीच खबर है कि रेप आरोपी की हत्या के बाद तनाव और दहशत को देखते हुए 4000 बंगाली मुस्लिम नगालैंड से पलायन कर चुके हैं। पांच मार्च को रेप के एक मामले में आरोपी सैयद फरीद खान को भीड़ ने जेल से खींच कर बाहर निकाला था और मार कर चौहारे पर टांग दिया था। 

दीमापुर के मुस्लिम काउंसिल के मुताबिक इस घटना में डरे हुए 1000 परिवारों ने घर छोड़ा है। बता दें कि रेपिस्ट की हत्या के बाद भीड़ ने प्रशासन और स्थानीय निगम से मांग की थी कि बाहरी मुस्लिमों को निकाला जाए। मुस्लिम व्यापारियों का ट्रेड लाइसेंस खत्म करने की भी मांग की गई थी। स्थानीय लोगों ने मांग की थी कि बंग्लादेशी मुस्लिमों को यहां से निकाला जाए। इस बीच, रविवार को इस मामले में मारे गए खान का शव उसके पैतृक निवास असम के करीमगंज जिले के गांव में दफना दिया गया। इस दौरान स्थानीय विधायक सिद्दिकी अहमद के अलावा कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

रेप पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पर पुलिस ने साधी चुप्पी
नगालैंड द्वारा रेप पीड़िता कॉलेज स्टूडेंट के मेडिकल रिपोर्ट पर नगालैंड पुलिस की चुप्पी से सवाल उठने शुरू हो गए हैं। शनिवार को असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने दावा किया था कि लड़की के साथ रेप जैसी वारदात नहीं हुई थी। आरोपी के भाई सुबेरुद्दीन ने कहा था कि उसके भाई से दो लाख रुपए की मांग की गई थी, पैसे न देने पर उसे फंसाया गया और उसकी हत्या कर दी गई।

पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
भीड़ द्वारा रेप के आरोपी को जेल से बाहर निकालकर मार डालने की घटना में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने भी शुरू हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार इस मामले में पुलिस का आचरण संदेह के घेरे में हैं। इन्हीं सूत्रों ने सवाल उठाया कि पुलिस को दस हजार लोगों के जुटने और हिंसक होने की जानकारी थी, फिर भी उसने कार्रवाई क्यों नहीं की। इसके अलावा दस हजार लोगों की भीड़ जब जेल में घुसी तो उसे ये कैसे पता लगा कि आरोपी कौन है और वह सीधे उस तक कैसे पहुंच गई। मामले की जांच एक रिटायर्ड सेशन जज को सौंप दी गई है।

नगा उग्रवादियों-असम पुलिस के बीच फायरिंग
नगालैंड में मूल रूप से असम के रहने वाले खान की हत्या के बाद वहां तनाव के कारण दोनों राज्यों की सीमा पर भी तनाव है। इसी कारण शनिवार रात और रविवार को असम के शिवसार जिले की सीमा पर नगा उग्रवादियों और असम पुलिस के बीच फायरिंग हुई।

आरोपी की नागरिकता को लेकर विवाद जारी
रेप के आरोपी सैयद फरीद खान की नागरिकता को लेकर अभी तक स्थिति साफ नहीं पाई। सोशल मीडिया के अलावा दीमापुर के पुलिस अधिकारी शुरू से खान के बांग्लादेशी घुसपैठी होने का आरोप लगा रहे हैं तो वहीं रविवार को उसके भाई ने मीडिया के सामने आ कर दलील दी कि उसके परिवार के कई लोग सेना में हैं तो वह बंग्लादेशी कैसे हो गया। मृतक के पास से जो लाइसेंस जारी हुआ है वह भी असम से जारी है। बता दें कि पांच मार्च को आरोपी की भीड़ द्वारा हत्या के बाद डीजीपी एलएल दुंगल ने कहा था कि हमें संदेह है कि वह बांग्लादेशी प्रवासी है। नगालैंड के आईजीपी वबांग लोथा ने कहा, ''आरोपी बांग्लादेशी था कि नहीं पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है। अभी तक इस मामले में हमारी जांच पूरी नहीं हुई है।''

आरोपी के बांग्लादेशी होने की खबर देने वाले की भी तलाश
पुलिस का कहना है कि इस बात की भी जांच कर रही है कि सबसे पहले सोशल मीडिया में यह न्यूज किसने दी कि आरोपी बांग्लादेशी था, क्योंकि उसी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया था। कहा जा रहा है कि स्थानीय सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर उस वक्त और सक्रिय हो गए जब उन्हें पता चला कि आरोपी बांग्लादेशी है। आरोपी की हत्या के दो दिन पहले तीन मार्च को नगा स्टूडेंट फेडरेशन (एनएसएफ) ने रेप की निंदा करते हुए बयान दिया था, ''दीमापुर में एक और बांग्लादेशी द्वारा नगा समुदाय की लड़की का रेप।'' स्थानीय अखबारों में छपी खबर में एनएसएफ के प्रेसिडेंट तोंगपांग ओजुकुम ने बयान दिया था, ''समय-समय पर नगा सिविल सोसाइटी अवैध रूप से आने वाले बांग्लादेशी माइग्रेंट्स के खतरों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल की घटना न केवल एक बड़ा अपराध है बल्कि नगा समुदाय के सामने चुनौती पेश करने वाला है।''

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