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दिल्ली में 'आप' की केजरीवाल के नेतृत्‍व में ऐतिहासिक जीत, विपक्ष नदारद

नई दिल्ली : अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी [आप] ने देश की राजनीति में नया इतिहास रचते हुए दिल्ली विधानसभा में अपनी झाडू से सभी राजनीतिक दलों का पूरी तरह सूपड़ा साफ कर दिया है। दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में आप के खातें में 67 आई हैं। इससे पहले सबसे अधिक 52 सीटें कांग्रेस ने 1998 के चुनाव में जीतीं थीं, लेकिन इस चुनाव में वह अपना खाता भी नहीं खोल पायी है। भारतीय जनता पार्टी [भाजपा] भी दिल्ली की राजनीति में अब तक की सबसे दयनीय स्थिति में है और उसके पास केवल तीन सीटें आई हैं। इससे पहले 1998 में भाजपा को सबसे कम 15 सीटें मिलीं थीं। जहां केजरीवाल ने अपनी जीत को आम आदमी की जीत बताया है, वहीं अंतिम परिणाम आने से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने जीत की बधाई दी और आश्वासन दिया कि दिल्ली के विकास के लिए उन्हें हर संभव सहयोग दिया जाएगा।​ मतदान के बाद आए सभी सर्वेक्षणों (एक्जिट पोल) में आप को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना जताई गई थी। एक एक्जिट पोल में तो आप को 70 सदस्यीय सदन में 53 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। 2013 में हुए चुनाव में भाजपा गठबंधन को 32 सीटें, आम आदमी पार्टी को 28 सीटें और कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं।

दिल्ली ने पिछले 20 साल में नहीं देखी ऐसी जीत
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जैसी जीत हासिल की है, इससे पहले ऐसी जीत दिल्ली ने कभी नहीं देखी थी। 1998 के चुनावों में कांग्रेस ने 70 में से 52 सीटें जीती थीं और करीब 48% वोट शेयर हासिल किया था। 1993 के चुनावों में बीजेपी ने 49 सीटें हासिल की थीं और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। इस चुनाव में कांग्रेस को मात्र 14 सीटें हासिल हुई थीं। 93 के चुनावों में बीजेपी का वोट शेयर 42% था। 1998 में कांग्रेस जीती तो 15 साल तक दिल्ली पर शासन किया और अब 2015 में ये तकरीबन तय है कि कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलेगा। अजय माकन ने महासचिव पद से इस्तीफा तो दे दिया है लेकिन क्या इतना काफी है? आज कांग्रेस मुख्यालय पर कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग की। 2013 में भाजपा ने 32 सीटें जीती थीं और आम आदमी पार्टी ने  28 सीटें। कांग्रेस ने भी 8 सीटें जीती थीं। अब 2015 में 54 प्रतिशत वोट शेयर के साथ आम आदमी पार्टी ने जैसी कामयाबी हासिल की है वैसी जीत दिल्ली की जनता ने कभी नहीं देखी थी। ये जीत यकीनन ऐतिहासिक है और कई मायने में बहुत महत्वपूर्ण भी। जनता ने तो प्रचंड बहुमत दिया है लेकिन अब देखना ये होगा कि अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी इस जनता के इस विश्वास पर कितना खरा उतर पाएगी।

सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं लोग?
- अजित कुमार- जय श्री राम हो गया काम.

- माधव श्रीमोहन- मफलर की ज़रुरत अब किरण बेदी को है. हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड जाने के लिए. प्रतिपक्ष में बैठने लायक भी नहीं बची.

- आनंद कुमार- महाराष्ट्र में ऐसी सिचुएशन को कहते हैं...पानीपत हो जाना.

- संजय झा मस्तान- ‘आप’ आये ‘बुहार’ आये.

- अभिषेक गुरेजा- आप की जीत ये भी दिखाती है कि दिल्ली असल में एक बहुत विशाल झुग्गी भी है.

- कुमुद सिंह- ले लहेरियासराय...किरन बेदी 300 वोटों से पीछे हो गई. कहां गए हो पात्रा जी..कुछ बोलिए...महाप्रवक्ता साहेब...अब तो माफ कर दो भाजपा को...कुपात्र सब ले डूबा

- अभिषेक रंजन- पहले राउंड में भाजपा हार गई......स्वीकार करिए...लेकिन चिंता मत करिए, तीन बजे के बाद वाला मतपेटी खुलने दीजिए....सब चित हो जाएंगे.

- अनिल कुमार- हवा निकलने की शुरुआत हो गई है.

- कुमार सुंदरम- ज्यादा खुश न हों...दोपहर के बाद कांग्रेस को भी सीटें मिलेंगी.

- प्रियंकर पालीवाल- भारतीय मतदाता के विवेक पर मुग्ध हुआ जाता हूं.

- मनीष जैसल- इन परिणामों को गौर से देखें तो पता चलता है कि जहां जहां मोदी जी ने रैली की वहां वहां बीजेपी हार रही है.

- विजय पांडे- झाड़ू का जादू चल गया दस लाख के सूट को मफलर निगल गया.
- चौधरी प्रशांत चहल- भई तमंचा फट के फ्लावर हो गया. अब ज़िम्मेदारी कौन ले रहा है.

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