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परमाणु पनडुब्बी अरिहंत को समुद्री परीक्षण के लिए दिखाई गई हरी झंडी

विशाखापत्तनम/नई दिल्ली : भारत के पहले स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को विशाखापत्तनम बंदरगाह से समुद्री परीक्षण के लिए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने हरी झंडी दिखाई। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि परमाणु पनडुब्बियों की श्रृंखला में पहली आईएनएस अरिहंत स्वदेश निर्मित है और 6000 टन का यह पोत 83 मेगावाट के दबावयुक्त हल्के पानी रियेक्टर से लैस है। पनडुब्बी को शामिल किए जाने के बाद परमाणु त्रयक पूरा हो जाएगा और भारत जल, थल और वायु आधारित प्रणालियों में परमाणु से लैस हो जाएगा और भारत जल, थल एवं वायु मार्ग से परमाणु मिसाइल छोड़ने में सक्षम हो जाएगा। अरिहंत समुद्र के अंदर लंबे समय तक रह सकेगा।

2009 में हुई थी लॉन्चिंग
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2009 में अरिहंत को लॉन्च किया था और वर्ष 2011 में इसे कमीशन किया जाना था, लेकिन कई कारणों से इसमें देरी हुई। भारतीय नौसेना के पास अभी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस चक्र है। यह रूस से दस वर्ष की लीज पर ली गई है।

परीक्षण में आई थी दिक्कतें
परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी और परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों का आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता। हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बी की आवाजाही भारत के लिए चिंता का विषय थी। नौसेना प्रमुख रोबिन धोवन ने बताया कि बहुप्रतीक्षित पनडुब्बी अब जल्द ही समुद्र में उतरने को तैयार है। अगस्त 2013 में इसके छोटे रिएक्टर में खराबी आने से इसके कमीशन में देरी हो गई। लेकिन अब इसे सौ फीसदी ठीक कर लिया गया है। विजाग में शिप बिल्डिंग सेंटर के बंदरगाह में 18 महीने तक चले ट्रायल के बाद इसे समुद्र में उतारा जाएगा। समुद्र की गहराई में K-15 बैलेस्टिक मिसाइलों (750 किमी रेंज) का टेस्ट फायर भी किया जाएगा।

वहीं, दूसरी आईएनएस अरिधमान को भी समुद्र में उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है। एस-4 नाम की तीसरी पनडुब्बी का निर्माण जारी है। प्रस्तावित परियोजना के मुताबिक, विजाग स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर को छह एसएसएन यानी बिना बैलेस्टिक मिसाइल्स वाली और परमाणु शक्ति से हमला करने वाली सबमरीन्स बनाने को कहा है।

छह एसएसएन का निर्माण
वर्तमान में भारतीय नौसेना रूस से ली गई आईएनएस चक्र (एसएसएन) की सेवाएं ले रही है। इसे एक बिलियन डॉलर की कीमत पर दस साल के लिए लीज पर लिया गया है। इस तरह की एक और बोट लेने की बात रूस से चल रही है। इन सबमरीन्स से शॉर्ट रेंज क्रूज मिसाइल फायर किया जा सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय संधियों की वजह से यह सबमरीन परमाणु हथियार से लैस नहीं की जा सकती। 
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