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रक्षा मंत्री ने नौसेना के सूचना और संचार विश्लेषण केंद्र का किया उद्घाटन

गुड़गांव। भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिहाज से रविवार का दिन बहुत अहम रहा। रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर गुड़गांव ने नौसेना के सूचना और संचार विश्लेषण केंद्र का उद्घाटन किया। यहां से हिंद महासागर औऱ दक्षिण चीन सागर तक समुद्र पर तैर रहे हर जहाज, हर छोटी-बड़ी नाव पर नजर रखी जा सकेगी। 26/11 मुंबई आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए अजमल आमिर कसाब अपने साथियों के साथ मछली पकड़ने वाली नाव कुबैर पर सवार होकर भारतीय सीमा में बड़ी आसानी से प्रवेश कर गया था। तब अपनी समुद्री सीमा में हो रही ऐसी किसी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए भारत के पास न साजो-सामान थे, ना ही तकनीक थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। भारतीय समुद्र में चाहे हजारों जहाज और नावें ही क्यों न हों, हर एक की हर पल की खबर नौसेना को मिलती रहेगी।

यह संभव हो सका है गुड़गांव स्थित इनफोर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर (आईमैक) से, जिसने अब काम करना शुरू कर दिया है। मुंबई हमले के वक्त इसकी योजना बनी थी। इस इमारत में अमेरिकी रेथियान कंपनी से आयातित अत्याधुनिक कोस्टल सर्विलांस सॉफ्टेवयर लगाया गया है। यहां से समूचे हिंद महासागर पर नजर रखी जा सकेगी। किसी भी पोत पर संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर रियल टाइम में संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दे दी जाएगी। दक्षिण चीन सागर भी यहां बैठे नौसेना के अधिकारियों की जद में होगा और उसकी हर नौवहन गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। एक अन्य अहम उद्देश्य यह भी है कि इस सेंटर के माध्यम से भारत उन देशों से संपर्क साध पाएगा, जिनकी सीमा हिंद महासागर से टकरती हैं। ऐसे 24 समुद्रतटीय देशों से तालमेल कर समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा।

जीसैट-7 ने बढ़ाई नौसेना की ताकत
पूरे प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है अंतरिक्ष से जहाजों पर नजर रखना और यह संभव हुआ है संचार उपग्रह जीसैट-7 से। देश के पहले इस सैन्य संचार उपग्रह को अगस्त 2013 में छोड़ा गया था। नौसेना के लिए समर्पित इस सैन्य उपग्रह को रुक्मिणी नाम दिया गया है। इसी की मदद से नौसेना अब हिंद महासागर के अधिकांश इलाके पर बेहतर निगरानी रख सकेगी और नेटवर्क आधारित समुद्री कार्रवाई कर सकेगी। अब तक नौसेना को अपनी सामान्य संचार जरूरतों के लिए अंतरराष्ट्रीय सैटलाइट इनमैरसैट पर भी निर्भर रहना पड़ता था।

40,000 नावों-जहाजों पर एक साथ नजर
- मुंबई आतंकी हमले के बाद तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट का कुल खर्च 453 करोड़ रुपए है। इसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीव डोवाल करेंगे।

- गुडगांव स्थित सेंटर से एक विशेषज्ञ टीम चौबीस घंटे जहाजों पर नजर रखेगी। इसके लिए राडार के साथ ही अंतरिक्ष यानों की मदद ली जाएगी।

- टीम का सीधा संपर्क 20 नेवी और 31 कोस्ट गार्ड स्टेशनों से रहेगा। देश के विभिन्न स्थानों पर तैनात संयुक्त ऑपरेशन केंद्र और मुख्यालय भी इस टीम से जुड़े रहेंगे।

- इनफोर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर (आईमैक) से एक दिन में 30,000 से 40,000 जहाजों पर नजर रखी जा सकती है।

- यदि कोई जहाज ने संदिग्ध अवस्था में अपनी दिशा बदलता है या कोई असामान्य हरकत करता है, तो उसका पता लगाकर उचित कार्रवाई की जा सकेगी। इसकी मदद से यह भी पता लगेगा कि किसी नौका पर खतरनाक सामग्री तो नहीं है।

जमीनी और समुद्री फर्क
नेवल स्टाफ के सहायक प्रमुख (कम्युनिकेशन, स्पेस एंड नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन्स) रियर एडमिरल केके पाण्डेय ने बताया है कि जमीनी सीमा पर नजर रखना आसान होता है, क्योंकि आप फैंसिंग कर सकते हैं, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन समुद्र में ये तमाम सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं। यह प्रोजेक्ट इसी कमी को पूरा करने के लिए बनाया गया है। यह प्रोजेक्ट नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनएमडीए) का सबसे अहम हिस्सा है। एनएमडीए को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है।

योजना के विस्तार के बनाए गए ब्लूप्रिंट के मुताबिक, समुद्रतटीय राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में कार्यरत स्टेट मॉनिटरिंग सेंटर्स को एनएमडीए प्रोजेक्ट से जोड़ा जाएगा। साथ ही शिपिंग हब और फिशरिस मॉनिटरिंग सेंटर्स भी शुरू किए जाएंगे। मुंबई आतंकी हमले के बाद स्थापित चार संयुक्त ऑपरेशन केंद्रों (मुंबई, कोच्ची, विजाग और पोर्टब्लेयर) को अपग्रेड किया जाएगा।

भारत की समुद्री सीमा
भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है। ये राज्य हैं- महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, दमन-दीव और लक्ष्यद्वीप।

चीन की खुराफातें
समुद्री सीमा में भारत को सबसे ज्यादा खतरा चीन से है। अरुणाचल और लद्दाख में आए दिन घुसपैठ करने वाला चीन समुद्र में भी खुराफात करता रहता है। हाल के वर्षों में भारतीय महासागर में चीनी सेना की गतिविधियां तेज हो गई हैं। यही नहीं चीन की सीमा भारत की समुद्री सीमा में युद्धपोतों और सबमरीन को तैनात कर रही है।

समुद्री डकैतों का खतरा
हाल के महीनों में समुद्री डाकुओं द्वारा भारतीय नाविकों को बंधक बनाए जाने के कुछ मामले सामने आए हैं। इस पर सरकार ने कहा है कि समुद्र में डकैती के बढ़ते खतरे को देखते हुए वह नौसेनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नीति पर कार्य कर रहा है।

जापान का सहारा
भारत की स्वदेशी तकनीक से निर्मित विमानवाहक पोत और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान के सबसे बड़े युद्धक पोत को चीन अपने लिए खतरा मान रहा है। बीते दिनों चीन की सरकारी मीडिया में आई एक खबर में आरोप लगाया गया कि कुछ देश बीजिंग की शक्ति को संतुलित करने के लिए नई दिल्ली का समर्थन कर रहे हैं। 'ग्लोबल टाइम्स' की वेबसाइट के एक लेख में कहा गया है कि भारत के 'आईएनएस विक्रांत' और जापान के हेलीकॉप्टर वाहक का सेना में शामिल किया जाना चीन के लिए चेतावनी की भांति है।

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