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बलभद्र सिंह थापा : इस गोरखा सेनापति ने किए थे ब्रिटिश आर्मी के दांत खट्टे

देहरादून। अपनी जाबांजी और कुशल सेना के दम पर ब्रिटिश आर्मी के दांत खट्टे करने वाले गोरखा सेनापति वीर बलभद्र सिंह थापा को गोरखा समुदाय आज भी अपना गौरव मानते हैं. उनकी याद में समुदाय द्वारा हर साल खलंगा स्मारक पर मेला ऑर्गनाइज किया जाता है. संडे को ऑर्गनाइज किए गए इस मेले में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे. दो बार हारी ब्रिटिश आर्मी अठाहरवीं सदी में गोरखा सेनापति वीर बलभद्र ने  देहरादून के पास नालापानी के पास खलंगा नामक स्थान एक किला बनाया था. पहाड़ के ऊंचे टापू पर बना होने के कारण किले को जीतना आसान नहीं था, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत इस किले को जीतने का मन बना चुकी थी. अक्टूबर 1814 में ब्रिटिश हुकूमत के सेनानायक मेजर रॉबर्ट गलस्की की लीडिंग में ब्रिटिश सेना ने किले पर चढ़ाई कर दी, लेकिन गोरखा सेना की वीरता के सामने ब्रिटिश को मुंह की खानी पड़ी. ब्रिटिश द्वारा किले को फतह करने की दूसरी कोशिश भी असफल रही और इस लड़ाई में रॉबर्ट गलस्की शहीद हो गए. आत्मसम्मान का सवाल था किला इतिहासकार राम सिंह थापा ने बताया कि किले को जीतना ब्रिटिश के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका था, जिस कारण अंग्र्रेजी सेना ने तीसरी बार किले पर जीतने के लिए किले को जाने वाली सभी पेयजल आपूर्ति बंद करवा दी. इस बार ब्रिटिश आर्मी को कर्नल माजी लीड कर रहे थे. कई दिनों तक हुई लड़ाई में आखिरकार गोरखा सेनापति वीर बलभद्र सिंह थापा की मौत के बाद गोरखा सेना ने हथियार डाल दिए, जिस कारण इस दिन खलंगा स्मारक पर मेला ऑर्गनाइज किया जाता है.



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