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भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाक की मलाला को शांति नोबेल पुरस्कार

नई दिल्ली: नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने नोबल शांति पुरस्कार के लिए भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को संयुक्त रुप से चुना है. दोनों को यह पुरस्कार उप महाद्वीप में बाल अधिकारों को प्रोत्साहित करने के उनके कार्य के लिए प्रदान किया जाएगा. 60 वर्षीय सत्यार्थी भारत में एक गैर सरकारी संगठन :(नजीओ) चलाते हैं और वह बच्चों को बंधुआ मजदूरी कराने और तस्करी से बचाने के अभियान से जुड़े हैं. वहीं 17 वर्षीय मलाला तब सुखिर्यों में आयीं जब तालिबान आतंकवादियों ने लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने को लेकर उन्हें गोली मार दी थी. नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने दोनों को इस वर्ष इस शीर्ष वैश्विक पुरस्कार के लिए चुना.

कौन हैं नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी?  
कैलाश सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने के बाद भारत में खुशी की लहर दौड़ गई है.  जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश और पूर्व महिला आईपीएस अधिकारी और प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने इसपर अपनी खुशी का इजहार किया है. जूरी ने कहा, ‘‘नार्वे की नोबेल समिति ने निर्णय किया है कि 2014 के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ उनके संघर्ष और सभी बच्चों की शिक्षा के अधिकार के लिए उनके प्रयासों के लिए दिया जाए.

बेसहारा बच्चों के मसीहा हैं कैलाश सत्यार्थी!  
नोबेल समिति ने कहा कि एनजीओ ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ चलाने वाले सत्यार्थी ने महात्मा गांधी की परंपरा को बरकरार रखा और ‘‘वित्तीय लाभ के लिए होने वाले बच्चों के गंभीर शोषण के खिलाफ विभिन्न प्रकार के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है.’’ समिति ने कहा कि वह ‘‘एक हिंदू और एक मुस्लिम और एक भारतीय और एक पाकिस्तानी के शिक्षा और आतंकवाद के खिलाफ साझा संघर्ष में शामिल होने को एक महत्वपूर्ण बिंदू मानता है.’’ 

मलाला को शांति पुरस्कार श्रेणी में गत वर्ष भी नामांकित किया गया था. मलाला ने तालिबान के हमले के बाद भी तब जबर्दस्त साहस दिखाया था जब उन्होंने विशेष तौर पर पाकिस्तान जैसे देश में बाल अधिकारों और लड़कियों की शिक्षा के लिए अपना अभियान जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी. मलाला सबसे कम आयु की नोबेल पुरस्कार विजेता बन गई हैं सत्यार्थी मदर टेरेसा के बाद शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं. सत्यार्थी और मलाला प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय उन हस्तियों की विशिष्ट सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने विश्व शांति और अन्य क्षेत्रों में अपने उल्लेखनीय कार्य के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार साझा किया. गोली लगने के बाद घायल मलाला को बेहतर इलाज के लिए बर्मिंघम स्थित क्वीन एजिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया था. वहां उनके उन घावों का इलाज किया गया था जो उनकी जान को खतरा उत्पन्न कर रहे थे. वह लड़कियों की शिक्षा का अपना अभियान जारी रखे हुए हैं.

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