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'गोरखा कल्याण समाज समिति ' के सांस्कृतिक कार्यक्रम की तस्वीरें देखें

दीपक राई
भोपाल।
देश के कोने-कोने में आकर इस मिटटी के हमदर्द और हमसाया बनकर रहने वाले लाखों नेपाली प्रवासी लोगों के पास अपनी जमीन और संस्कृति से जुड़ने का मौक़ा बहुत काम ही मिल पाता है। उसी कड़ी में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाले नेपाली भाषी गोरखा लोग जो अपने देश नेपाल से यहाँ जीविकापार्जन के लिए कई सालों से निवासरत है, उनकी कहानी भी कमोबेश यही है। राजधानी में रहने के कारण इनकी रफ़्तार बहुत तेज़ है जिसमे इनको बहुत काम अवसरों पर ही अपनी माटी और संस्कृति से रूबरू ना होने का मलाल रहता है। भोपाल में इसी विषमता को दूर करने के लिए यहाँ पर रहने वाले लगभग 60,000 प्रवासी नेपाली लोगों की अपनी एक समाज समिति है। जिसका नाम 'गोरखा कल्याण समाज समिति ' है जो विगत पांच सालों से कार्यरत है। 

समाज के विभिन्न परेशानियों को दूर करने के लिए यह मजबूती से काम कर रही है। समिति के अध्यक्ष दिल बहादुर थापा ने बताया कि भोपाल में नेपाल से कई लोग ऐसे है जिनकी बहुत छोटी-छोटी परेशानी दूर नहीं हो पाती है। यह लोग सांस्कृतिक रूप से भी अपने को अलग-थलग पाते है , जिसको दूर करने के लिए हमारी समिति कार्य कर रही है। प्रदेश भर में कई नेपाली समाज के लोग सरकारी और प्राइवेट संस्थानों के नौकरी कर रहे है। अपने जीवनस्तर को लगातार उंचा करने का प्रयास कर रहे है। हाल ही में इस समिति ने अपना पांचवा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया।  बहुत बड़ी तादाद में लोगो ने हिस्सा लिया।  मगर, तमु, किराती और आधुनिक गीतों के मंचन से दर्शको ने आत्मीय आनंद प्राप्त किया। इस पल के कुछ पलो को आपके समक्ष पेश कर रहा हूँ।  










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