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दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में मुख्यमंत्री कार्यालय खोलने का निर्णय

दार्जिलिंग: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए दार्जिलिंग में मुख्यमंत्री कार्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है. इस कार्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति होगी. यह अधिकारी पहाड़ के लोगों की विभिन्न समस्याओं को सुनेंगे और उनके समाधान की कोशिश करेंगे. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं जब दार्जिलिंग के दौरे पर आयेंगी, तो वह भी इस कार्यालय में बैठेंगी. बुधवार को जीटीए की बैठक में यह निर्णय लिया गया. कालिम्पोंग में राज्य सरकार के साथ जीटीए की दोपक्षीय बैठक हुई और इसमें कई निर्णय लिये गये, हालांकि इस बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हुईं. राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव संजय मित्र तथा गृह सचिव वासुदेव बनर्जी इस बैठक में शामिल हुए. 

बैठक में चार विद्युत परियोजना की शुरूआत की भी मंजूरी दी गयी. इनमें से तीन परियोजनाओं का निर्माण तीस्ता में होगा, जबकि एक का निर्माण दार्जिलिंग के रम्माम में करने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही कार्सियांग में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का भी निर्णण इस बैठक में लिया गया. कड़ी सुरक्षा तथा आशा एवं आकांक्षाओं के बीच कालिम्पोंग में यह बैठक शुरू हुई और गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) की ओर से रोशन गिरि, त्रिलोक देवान, विनय तामांग आदि इस बैठक में शामिल हुए. उधर. जीटीए की बैठक के बाद गोजमुमो नेताओं ने अलग से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बातचीत की. मुख्यमंत्री के साथ करीब 20 मिनट तक गोजमुमो नेताओं ने बातचीत की.

क्या कहा गोजमुमो नेता रोशन गिरि ने
बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए गोजमुमो नेता रोशन गिरि ने कहा है कि जीटीए समझौते के दौरान राज्य सरकार के जिन विभागों को जीटीए को हस्तांतरित करने की बात थी, उन विभागों को शीघ्र हस्तांतरण की मांग राज्य सरकार से की गयी है. उन्होंने कहा कि जिन चार विद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी है, उसके निर्माण का काम एनएचपीसी को सौंपने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही उन्हाेंने राज्य सरकार से 119 करोड़ रुपये जीटीए को देने की मांग की. श्री गिरि ने बताया कि दार्जिलिंग गोरखा पार्वत्य परिषद के रहते 119 करोड़ रुपये राज्य सरकार को वापस लौटा दिये गये थे. 

राज्य सरकार ने पहाड़ पर विभिन्न विकास कार्यो के लिए इस धन को मंजूर किया था. अब जबकि दागोपाप का अस्तित्व खत्म हो गया है, तो ऐसे में 119 करोड़ रुपये जीटीए को दिये जाने चाहिए. इन रुपयों की मदद से वह पर्वतीय क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के विकास के काम करेंगे. बैठक में रोशन गिरि ने पहाड़ की समस्या को लेकर त्रिपक्षीय बैठक भी बुलाने की मांग राज्य सरकार से की है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान विभिन्न समस्याओं के समाधान संभव नहीं हो पा रहा है. जीटीए के समझौते पर केंद्र सरकार ने भी हस्ताक्षर किये हैं, इसलिए जीटीए के मुद्दे पर त्रिपक्षीय बैठक बुलायी जानी चाहिए.

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