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कश्मीर बाढ़ : 1500 से ज्यादा नेपाली दिहाड़ी मजदूर फंसे

श्रीनगर। जम्मू एवं कश्मीर में आई बाढ़ में 1,500 से ज्यादा नेपाली युवक फंसे हुए हैं। इनमें से अधिकतर युवक दिहाड़ी मजदूर हैं। बाढ़ में फंसे इन युवकों में से 300 से ज्यादा युवक अकेले भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सप्तरि जिले के हैं। इन  नेपालियों के गांवों और परिवारों में दुख और निराशा छाई हुई है। लोग अपने प्रियजनों के बारे में किसी भी प्रकार की खबर मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।  हालांकि, नेपाल सरकार ने जम्मू एवं कश्मीर की बाढ़ में फंसे नेपालियों के बारे में अभी तक आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, जम्मू एवं कश्मीर में काम कर रहे 1,000 से ज्यादा नेपालियों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। सेब और अन्य फल तोडऩे के लिए अधिकतर नेपाली मौसमी प्रवासियों के तौर पर भारत के जम्मू एवं कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में आते हैं। सप्तरि गांव के एक युवक चंदेश्वर कामायत ने बाढग़्रस्त जम्मू एवं कश्मीर से फोन पर ‘द हिमालयन टाइम्स’ समाचार पत्र को बताया कि सप्तरि जिले के विभिन्न गांवों के 300 से ज्यादा युवक बाढ़ में फंसे हैं।  चंदेश्वर ने बताया कि बाढ़ में फंसे और लापता नेपालियों में से अधिकतर दिहाड़ी मजदूर हैं।

इन नेपालियों के परिवारों ने अपने प्रियजनों को बचाने के लिए नेपाल सरकार से शीघ्र कार्रवाई करने की गुहार लगाई है क्योंकि बड़े त्यौहार पास आ रहे हैं। उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार की उदासीनता की भी आलोचना की। इससे पहले भारतीय वायुसेना ने जम्मू एवं कश्मीर में फंसे नेपाल में भारतीय राजदूत रंजीत राय, नई दिल्ली में नेपाल मिशन के उप प्रमुख कृष्णा प्रसाद धाकल और भारत व नेपाल के दर्जन भर से ज्यादा अधिकारियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था। वे ‘बी.पी. कोईराला नेपाल-भारत फाउंडेशन’ की बैठक में भाग लेने के लिए जम्मू एवं कश्मीर आए थे। नेपाल सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास से जम्मू एवं कश्मीर में काम कर रहे नेपालियों की सही संख्या पूछी जाएगी और बाढ़ में फंसे नेपालियों की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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