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पढ़ें: लाल किला से पीएम मोदी के भाषण की मुख्य बातें

नई दिल्ली। 68वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लाल किले से देश को संबोधित किया। मोदी आज सबसे पहले राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पीएम लाल किला पहुंचे और सेना ने उन्हें सलामी दी। यहां पर बड़ी संख्या में मोदी को सुनने के लिए जनसमूह मौजूद था। खास बात ये रही कि मोदी ने बिना लिखा भाषण दिया और बुलेट प्रूफ शीशे की दीवार भी नहीं लगी है। इस दौरान मोदी ने सबसे महत्वपूर्ण ऐलान किया योजना आयोग को खत्म करने का। साथ ही उन्होंने सांप्रदायिकता, जातिवाद, प्रांतवाद को भूलकर देश निर्माण में लग जाने को कहा। मोदी ने बेटियों की सुरक्षा और गरीबी से लड़ने का मुद्दा भी उठाया। मोदी का भाषण मैं प्रधानमंत्री के रुप में नहीं प्रधानसेवक के रूप में उपस्थित हूं। देश की आजादी की जंग कितने वर्षों तक लड़ा गया, अनगिनत लोगों ने बलिदान दिया। कई पीढ़ी खप गई। जेल में जिंदगी गुजर गई। उन सभी आजादी के सिपाहियों को मैं शत शत नमन करता हूं। 

आजादी के इस पावन पर्व पर भारत के कोटि कोटि जनों को भी मैं प्रणाम करता हूं। समाज में पिछड़े सभी लोगों के लिए कुछ कर गुजरने का पर्व आया है। राष्ट्रीय पर्व राष्ट्रीय चरित्र को निखारने का एक अवसर होता है। राष्ट्रीय पर्व से प्रेरणा लेकर जन जन का राष्ट्रीय चरित्र जितना अधिक निखरे, हर कार्यकलाप राष्ट्र हित में कसे जाएं, अगर हम उस कसौटी पर जिएं को आजादी का पर्व एक प्रेरणा का पर्व बन सकता है। ये देश राजनेताओं ने नही बनाया, शासकों ने नहीं बनाया, देश सरकार ने भी नहीं बनाया। देश किसानों ने बना है, मजदूरों ने बनाया है। हमारी माता बहनों ने बनाया है, नौजवानों ने बनाया है। शिक्षकों, वैज्ञानिकों, समाजसेवकों ने बनाया है। एक छोटे गांव का बालक आज लाल किले की प्राचीर से तिरंगे के सामने सिर झुकाने का सौभाग्य प्रात किया। ये भारत के लोकतत्र, संविधान की ताकत है। मैं संविधान निर्माओं को नमन करता हूं। देश आज जहां पहुंचा है, उसमें इस देश के सभी प्रधानमंत्रियों का योगदान है, सरकारों का योगदान है। मैं सभी पूर्व सरकारों, प्रधानमंत्रियों, उनके कार्यों को उन सभी के प्रति आभार जताना चाहता हूं। 

मैं दिल्ली के आउटसाइडर हूं। यहां के एलीट क्लास से दूर रहा हूं। मैंने यहां एक इनसाइडर लिया। ये मंच राजनीति का नहीं राष्ट्रनीति का है। मेरी बातों को राजनीति के तराजू से न तोला जाए। मैंने यहां जो अनुभव किया मैं चौंक गया। ऐसा लगा जैसे एक सरकार के अंदर दर्जनों सरकार चल रही है। हर एक की अलग अलग जागीर है। एक विभाग दूसरे विभाग से भिड़ रहे हैं। सुप्रीम में जाकर विभाग आपस में लड़ रहे हैं। मैंने उस दीवार को गिराने की कोशिश की है। सरकार की एक दिशा हो, इस दिशा में हम देश को चलाने का संकल्प करें। मैं कुछ दिन से देखा कि समाचार पत्रों और टीवी में सरकारी कर्मचारियों के समय पर ऑफिस पहुंचने की खबरें छपती रही हैं। क्या इस देश के अफसर समय पर दफ्तर जाएं ये क्या न्यूज बनती है। और अगर ऐसा होता है तो पता चलता है हम कितना नीचे गिरे हैं। लोगों की पूर्ति के लिए शासन व्यवस्था के पुर्जे को और धारदार बनाना है। हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार में बैठे लोगों का सामर्थ्य बहुत है। मैं उस शक्ति को जगाना चाहता हूं। 

नक्सलवादियों और आतंवादियों से मैं कहना चाहता हूं कि कंधे पर बंदूक लेकर धरती को लाल तो कर सकते हैं, कंधे पर हल होगा तो धरती हरी भरी लहलहाती नजर आएगी। हिंसा से हमें कुछ हासिल नहीं होगा। हिंसा भारत मां पर दाग है। जातिवाद, सांप्रदायिकतावाद और प्रांतवाद को भूल जाइए। 10 के लिए इस सब को भूल जाइए, फिर देखों देश किस रास्ते पर जाता है। सदभावना भाईचारे का रास्ता अपनाएं, देश बहुत आगे बढ़ेगा। क्या-क्या कहा मोदी ने? -इस दौरान मोदी ने योजना आयोग खत्म करने का ऐलान किया। मोदी ने कहा कि योजना आयोग में ढांचागत परिवर्तन कर नए संस्थान का गठन किया जाएगा। जल्दी ही नए संस्था का ब्लूप्रिंट जारी किया जाएगा। -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 68वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 'अत्यधिक गरीब' लोगों के लिए बैंक खाता खोलने और उनके लिए 1,00,000 रुपये के बीमा योजना की घोषणा की। 

मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना' के माध्यम से हम गरीब से गरीब लोगों के लिए बैंक खाता खुलवाना चाहते हैं। "जन धन योजना' के तहत गरीब लोगों का एक लाख रुपये का बीमा कराया जाएगा। -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वभर के निवेशकों से अपील की कि वे भारत विनिर्माण का केंद्र बनाएं। उन्होंने कहा, "कम, मेक इन इंडिया" मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि मैं विश्वभर से कहता हूं, भारत में सामान का उत्पादन करें। सामान कहीं भी बेचें, लेकिन इसका उत्पादन भारत में करें। हमारे पास कौशल और योग्यता है। हमारा सपना होना चाहिए कि हम विश्वभर में कह सकें, 'मेड इन इंडिया'। -नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की प्रगति के लिए भारतीयों से 'जातिवाद' और 'सांप्रदायिकता' के जहर को छोड़ने और एकता को गले लगाने की अपील की। 

लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शर्म की बात है कि आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति जारी है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि यह कब तक चलता रहेगा। बहुत लड़ाई लड़ ली, बहुत लोगों की जानें गईं, पीछे मुड़कर देखिए, क्या किसी को कुछ मिला? मोदी ने कहा कि सालों से चल रहे रक्तपात ने भारत माता को केवल गहरे घाव दिए हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों से कम से कम केवल 10 साल के लिए जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि शांति, एकता, भाईचारा लेकर साथ चलें। केवल यही चीजें आगे बढ़ने में हमारी मदद कर सकती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब भी दुष्कर्म की घटना सामने आती हैं, देश का सिर शर्म से झुक जाता है। मोदी ने कहा कि जब कभी हम दुष्कर्म की घटनाओं के बारे में सुनते हैं, हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। -उन्होंने कहा कि मातापिता बेटियों पर बंधन डालते हैं, लेकिन उन्हें अपने बेटों से भी घर से बाहर निकलने पर पूछना चाहिए कि वे कहां जा रहे हैं। मोदी ने कहा कि क्योंकि किसी महिला के साथ दुष्कर्म करने वाला व्यक्ति किसी का बेटा होता है। एक माता-पिता होने के नाते क्या वे अपने बेटों से पूछते हैं कि उनका बेटा कहां जा रहा है? आप अपने बेटों पर वैसे ही बंधन क्यों नहीं लगाते। 

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