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पिस्टल किंग जीतू राई ने 50 मी. पिस्टल स्पर्धा में जीता स्वर्ण पदक

ग्लासगो : पिस्टल किंग जीतू राई ने अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप प्रदर्शन करते हुए आज स्वर्ण पदक जीता, जबकि अनुभवी गगन नारंग और गुरपाल सिंह ने रजत पदक अपने नाम किए, जिससे भारतीय निशानेबाजों ने 20वें राष्ट्रमंडल खेलों की प्रतियोगिताओं के पांचवें दिन भी अपना दबदबा जारी रखा। दुनिया के चौथे नंबर के निशानेबाज 26 वर्षीय राई ने पुरुष 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसी स्पर्धा में गुरपाल सिंह रजत पदक जीतने में सफल रहे, जबकि पहली बार 50 मीटर राइफल प्रोन स्पर्धा में हिस्सा ले रहे नारंग के नाम भी रजत पदक रहा। इन तीन पदकों के साथ निशानेबाजी में भारत के पदकों की संख्या 12 पहुंच गई है, जिसमें चार स्वर्ण, सात रजत और एक कांस्य पदक शामिल है। आज तीन और पदक मिलने से भारत के कुल पदकों की संख्या 25 हो गई है, जिसमें सात स्वर्ण, 11 रजत और सात कांस्य पदक शामिल है। भारत फिलहाल पदक तालिका में चौथे स्थान चल रहा है। ऑस्ट्रेलिया 27 स्वर्ण, 21 रजत और 27 कांस्य पदक के साथ पहले स्थान पर है। इंग्लैंड (24 स्वर्ण, 17 रजत और 19 कांस्य) दूसरे, जबकि मेजबान स्काटलैंड (12 स्वर्ण, आठ रजत और 11 कांस्य) तीसरे स्थान पर है। राय ने राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण करते हुए 194.1 अंक के साथ अपना पहला पदक जीता। 

गुरपाल ने 187.2 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जो उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है। आस्ट्रेलिया के डेनियल रेपाचोली तीसरे स्थान पर रहे। नेपाल में जन्में राई ने पिछले महीने विश्व कप में 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण और 50 मीटर पिस्टल में रजत पदक जीता था। वह पहली सीरीज के बाद तीसरे स्थान पर चल रहे थे लेकिन वापसी करने में सफल रहे और फिर हर सीरीज के बाद शीर्ष पर रहे। इससे पहले 2006 और 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में अलग स्पर्धाओं में चार-चार पदक जीतने वाले नारंग केवल 0.7 अंक के अंतर से ऑस्ट्रेलिया के वारेन पोटेंट से स्वर्ण पदक गंवा बैठे। नारंग ने 20 शॉट के फाइनल राउंड में 203.6 अंक बनाये, जबकि स्वर्ण पदक विजेता पोटेंट ने 204.3 अंक हासिल किये। इंग्लैंड के कीनथ पार ने कांस्य पदक जीता। नारंग ने राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार 50 मीटर राइफल प्रोन में भाग लिया था, जो उनकी पसंदीदा स्पर्धा नहीं मानी जाती है। लंदन ओलंपिक 2012 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में कांस्य पदक जीतने वाले नारंग कल 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में भी हिस्सा लेंगे। भारत का 50 मीटर राइफल प्रोन में यह राष्ट्रमंडल खेलों में दूसरा पदक है। इससे पहले संजीव राजपूत ने 2006 मेलबर्न खेलों में इस स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। नारंग आज राष्ट्रमंडल खेलों में नौ स्वर्ण पदक जीतने वाले तीसरे निशानेबाज बनने से चूक गये लेकिन उनके पास 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में मौका रहेगा। 

भारत के जसपाल राणा और इंग्लैंड के माइकल गौल्ट ने राष्ट्रमंडल खेलों में नौ-नौ स्वर्ण पदक जीते हैं। मुक्केबाजी में एशियाई चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वाले देवेंद्रो सिंह (49 किग्रा) ने श्रीलंका के मदुशन गमागे को कड़े मुकाबले में 2-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। मणिपुर का यह 22 वर्षीय मुक्केबाज अंतिम आठ के मुकाबले में 30 जुलाई को स्काटलैंड के अकील अहमद से भिड़ेगा। एशियाई चैम्पियन शिव थापा (56 किग्रा) को हालांकि ओलंपिक कांस्य पदक विजेता उत्तरी आयरलैंड के माइकल कोनलान के हाथों 0-3 से शिकस्त का सामना करना पड़ा। बैड़मिंटन की मिश्रित टीम स्पर्धा के कांस्य पदक के प्ले आफ में भी भारत को सिंगापुर के हाथों 2-3 से शिकस्त झेलनी पड़ी। गत उप विजेता भारतीय टीम को इससे पहले कल सेमीफाइनल में 2010 दिल्ली खेलों के कांस्य पदक विजेता इंग्लैंड के हाथों 0-3 से शिकस्त का सामना करना पड़ा था। दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष टेबल टेनिस टीम भी तीसरे स्थान के मैच में नाईजीरिया से 1-3 से हार गयी। भारतीय टीम को इससे पहले कल सेमीफाइनल में इंग्लैंड के हाथों 1-3 से शिकस्त क्षेलनी पड़ी थी। भारतीय टीम 2002 मैनचेस्टर में टेबल टेनिस के इन खेलों का हिस्सा बनने के बाद पहली बार टीम स्पर्धा से खाली हाथ वापस लौट रही है।

सौरव घोषाल की इंग्लैंड के पीटर बार्कर से कांस्य पदक के प्लेआफ मुकाबले में हार के साथ ही भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में स्क्वाश का पहला पदक जीतने का इंतजार बढ़ गया। विश्व में 16वें नंबर के घोषाल को आठवीं रैंकिंग के खिलाड़ी के खिलाफ अपनी पहली जीत के लिये कुछ खास प्रदर्शन करने की जरूरत थी। उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया लेकिन आखिर में 5-11, 11-6, 5-11, 6-11 से हार गये। भारतीय स्क्वाश टीम के साथ युगल और मिश्रित युगल स्पर्धाओं में पदक के सूखे को समाप्त करने का बेहतर मौका होगा। एथलेटिक्स में सी नारायण सिंह ने पुरुष हैमर थ्रो (तार गोला फेंक) स्पर्धा के फाइनल्स के लिए क्वालीफाई किया, जबकि कमलप्रीत सिंह क्वालीफाइंग राउंड से ही बाहर हो गए। तेइस वर्षीय नारायण ने तार गोले को पहले प्रयास में 67.75 की दूरी तक फेंका, जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास रहा और यह उन्हें 12 खिलाडियों के फाइनल में जगह दिलाने के लिए काफी था। दूसरे ग्रुप में चुनौती पेश कर रहे कमलप्रीत ने अपने पहले प्रयास में 65.25 मीटर की दूरी तय की जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास रहा। वह अपने ग्रुप में छठे स्थान रहे लेकिन शीर्ष 12 में जगह नहीं बना पाए।
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