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नेपाल में गृहयुद्ध के दौरान हुई हत्याओं की होगी जांच

काठमांडू। माओवादी विद्रोहियों से निपटने के लिए नेपाल में एक दशक तक चले गृहयुद्ध के दौरान हुई 16 हजार मौतों की जांच का रास्ता साफ हो गया है। नेपाली संसद ने शनिवार को सत्य एवं तालमेल आयोग (टीआरसी) और लापता लोगों की जांच के लिए आयोग के गठन से संबंधित विधेयक को कुछ संशोधनों के साथ पारित कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि टीआरसी और जांच आयोग गृहयुद्ध के दौरान हुई हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच करेंगे। मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर मामलों के लिए विशेष अदालत का गठन किया जाएगा। टीआरसी जिन मामलों की जांच कर आगे बढ़ाएगा उनमें सरकारी अटॉर्नी केस दाखिल करेंगे। कानून मंत्री नरहरि आचार्य ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि संशोधनों में सभी दलों की मांग का ख्याल रखा गया है। 

यह विधेयक गृहयुद्ध के दौरान लगे आरोपों की जांच की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम है। गृहयुद्ध की समाप्ति पर 21 नवंबर, 2006 को जिस शांति समझौते पर सरकार और तत्कालीन सीपीएन-माओवादी पार्टी ने हस्ताक्षर किए थे। उसमें इन आयोग के गठन की बात भी कही गई थी। लेकिन, इसके लिए देश को आठ साल इंतजार करना पड़ा। इस विधेयक पर नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और यूसीपीएन-माओवादी ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें सरकार ने दूर कर दिया है। यूसीपीएन-माओवादी गृहयुद्ध के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में छूट की मांग कर रही थी। इस मुद्दे पर वह लगातार सरकार से भिड़ी हुई थी। लेकिन, मधेसी पार्टियों समेत अन्य दलों से मिले समर्थन के चलते नेपाली कांग्रेस सरकार इस विधेयक को पारित कराने में सफल रही।

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